बिलासपुर
राकेश मिश्रा
बिलासपुर जिले के तखतपुर में एक पुल पिछले छः वर्षों से टूटा पड़ा हुआ है।लोग पुल की मरम्मत कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं से आवेदन निवेदन की अर्जी लगा लगाकर थक चुके हैं।लेकिन अधिकारी कहते हैं कहां पर का पुल है मुझे नहीं मालूम आप लोकेशन और फोटो अवेलेबल करा दीजिए।अब इतना बड़ा पुल छः वर्षों से टूटा पड़ा है ,जो जनपद मुख्यालय से महज दस किलोमीटर की दूरी पर ही है। लेकिन कई आवेदन निवेदन के बाद भी जानकारी नहीं होने की बात कहना घोर उदासीनता को दर्शाता है।
तखतपुर के विजयपुर के आश्रित ग्राम पचधार और मुंगेली जिले के रवेली को जोड़ने वाला पुल 2019 में आए बाढ़ में पूरी तरह बह गया है।इससे दोनों जिलों के सीमावर्ती गांव के लोगों के साथ साथ लोरमी की ओर से बिलासपुर जाने वाले लोगों को भी परेशानी और लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।मनियारी नदी पर बने इस रपटानुमा पुल से पचधार के प्राथमिक शाला के बच्चे रवेली जाते है और रवेली के हाई स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी पोड़ी और विजयपुर जाते है।लेकिन अपनी जान हथेली पर रखकर इस पुल को पार करते हैं।इसी तरह किसानों और छोटे व्यापारियों को भी इस टूटे पुल का दंश झेलना पड़ रहा है ।उन्हें अपनी फसल और अपने सौदे लाने ले जाने के लिए और व्यापार करने के लिए या तो इस पुल पर खतरों के खिलाड़ी बनकर पार करें या फिर अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट राशि देकर अपना काम बनाए क्योंकि इस पुल के अनुपयोगी हो जाने ने दूसरा रास्ता जर्जर और लंबा होने की वजह से समय और धन दोनों अतिरिक्त लगता है।
अब यदि किसी की सेहत खराब हो जाए,तो उसे इलाज के लिए ले जाने के लिए भी यह पुल बड़ी सहूलियत देता था ।लेकिन इसके टूट जाने से नदी के उस पार मुंगेली जिले के बीमार को मर्ज के इलाज के लिए दूसरा रास्ता देखना पड़ता है, जो कि लंबा और खराब है। भारी हाइवा और ट्रक,जिसे पहले ही गहरे गड्ढों में तब्दील कर चुका है।इलाज कराना है तो जानलेवा टूटे पुल से तो लंबा और गड्ढों से गुजरना बेहतर।
भूपेश बघेल की घोषणा के बाद भी नहीं हुआ काम
इस टूटे पुल की मरम्मत के लिए क्षेत्र की जनता ने पूर्व वर्ती शासन काल के मुखिया भूपेश बघेल से भेट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान की थी।तब उन्होंने इस पुल की मरम्मत के लिए 72 लाख की राशि स्वीकृत किए जाने की घोषणा की थी।लेकिन उसके बाद सरकार बदल गई लेकिन पुल और आपस के लोगो की भी नियति जा की तस रही।न तो पुल बना और न ही मरम्मत का काम हुआ।अब तो अधिकारी इस पुल के टूटे होने की जानकारी होने से भी इन्कार कर रहे हैं।ऐसे में दो जिलों को जोड़ने वाला यह पुल कब बनेगा इसे कोई नहीं बता सकता है।
पुल की मरम्मत के लिए आवेदन निवेदन करके थकने के बाद ग्रामीणों ने शासन से उम्मीद छोड़ कर इस पुल को कम से कम आने जाने लायक बनाने का दायित्व खुद लिया और पुल पर जन सहयोग से मुरूम डालकर आने जाने के लायक बना लिया।अब इसमें से मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर चल सकता है मगर वह भी जोखिम भरा रहता है।साथ ही जब बरसात आता है और पानी पुल के ऊपर से गुजरता है तो अपने साथ ग्रामीणों द्वारा पाटे गए मुरूम को भी बहाकर ले जाता है।इससे ग्रामीणों की समस्या फिर जस की तस हो जाती है।
ग्रामीण अखिलेश मिश्रा ने बताया कि इस पुल के टूट जाने से विजयपुर के आश्रित ग्राम पचधार के प्राथमिक स्कूल के बच्चों और रवेली से विजयपुर और पोड़ी पढ़ने जाने वाले बच्चो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।बरसाते जब पानी भर जाता है तो या तो बच्चे 5 किलोमीटर दूरी तय कर स्कूल जाते है, और जो नहीं जा सकते वे पानी कम होने तक स्कूल ही नहीं जाते हैं।इसी तरह बीमार व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा के लिए भी 5 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता है।यह पहले और भी खराब था गांव वालो और ट्रैक्टर वालों के सहयोग से पुल मुरूम हम लोगों ने ही डलवाया है जिससे थोड़ा बहुत आने जाने लायक बना है।फिर भी जब बरसात आती है तो मुरूम बह जाता है तो परेशानी जस की तस रह जाती है।
जनपद सदस्य विद्यानंद चंद्राकर ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व खुड़िया में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके पुर्ननिर्माण के लिए 72 लाख की घोषणा की थी।मगर सरकार बदल गई और भाजपा के शासन काल के दो वर्ष बीत गए नेता इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।कई बार आवेदन निवेदन और ध्यानाकर्षण कर चुके हैं लेकिन किसी भी आवेदन निवेदन का कोई असर दिखाई नहीं दिया है।अब केवल आंदोलन का रास्ता बचा है।आखिर जनता कब तक इस टूटे पुल के बनने की बाट जोहती रहेगी।पुल को नया नहीं बना सकते तो कम से कम आवागमन के लायक ही बनाकर दे दें।
रवेली सरपंच प्रेमचंद कश्यप ने बताया कि पुल का निर्माण लगभग 15 बीस वर्ष पूर्व हुआ था।2019 में जब बाढ़ आई तो यह पुल बह गया ।पुल के बह जाने से लोरमी से बिलासपुर जाने वालो और तखतपुर से लोरमी जाने वालों को अतिरिक्त दूरी तय करके जाना पड़ता है।स्कूली बच्चों को भी आने जाने की समस्या होती है।पुल को जन सहयोग से मुरूम से पाटकर चलने योग्य बनाते है मगर बरसात आने पर वह फिर बह जाता है।कब तक ऐसा करते रहेंगे।शासन प्रशासन से आवेदन करके थक चुके है।अब ग्रामीण इसे अपनी किस्मत मानकर परिस्थितियों से समझौता कर चुके है उन्हें शासन प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं रही है।
अधिकारियों का कहना है
टूटे हुए पुल के मामले में जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष राठौर से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि— “मुझे तखतपुर आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। इस विषय में फिलहाल विस्तृत जानकारी नहीं है। मैं कल इस मामले की जानकारी लेकर ही किसी भी प्रकार का स्पष्ट बयान दे पाऊंगा।”
जर्जर रपटा पुल और ग्रामीणों को हो रही समस्याओं के बारे में जब एसडीएम नितिन तिवारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा— “आप इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी मुझे भेज दीजिए। मैं संबंधित विभाग को प्रपोज़ल तैयार कर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दूंगा।