बिलासपुर
राकेश मिश्रा
बच्चे देश का भविष्य हैं और इस भविष्य को स्वस्थ्य और मजबूत बनाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।पोषण से संबंधित कई योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे है।प्रदेश में भी बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के लिए सरकार लगातार योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आंगनबाडियों में पोषण अभियान को मजबूत करने और मासूम बच्चों के शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन के सतत् निरीक्षण नहीं किए जाने से शासन की योजनाओं से करोड़ों खर्च किए जाने के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है। बिलासपुर जिले में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सरकारी प्रयासों को सवालों के घेरे में खड़ा कर रही है।
तखतपुर जनपद क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 01 पोंगरिहा में घोर अनियमितता का मामला सामने आया है। केंद्र में सप्लाई की गई दाल में घुन पाए जाने से बच्चों को खराब भोजन परोसने की नौबत आ गई है। बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी कर्मियों को मजबूरी में इसी खराब दाल से गर्म भोजन तैयार कर परोसना पड़ रहा है, क्योंकि उच्च अधिकारी बार-बार मौखिक शिकायत के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।आंगन बाड़ी केंद्र में खराब राशन सप्लाई किया जा रहा है।इसका निरीक्षण जिम्मेदारों के द्वारा नहीं किए जाने से गरम भोजन के द्वारा बच्चों और महिलाओं को सुपोषित करने का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है। पोंगरिहा में बच्चों को परोसा जा रहा खराब और स्तरहीन खाद्य सामग्री से पोषण तो नहीं मिलेगा लेकिन बीमारियों जरूर मिलेंगी ।ऐसा केवल पोंगरिहा में ही नहीं लगभग क्षेत्र से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में हो रहा है ,जहां बच्चों को दिए जाने वाले गरम भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंच रहा है।सारा निरीक्षण ऑफिस में बैठकर फोन के माध्यम से किया जा रहा है।यही कारण है कि जब इस विषय के विकासखंड के महिला एवं बाल विकास अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने जवाबदेही से बचते हुए कुछ भी नहीं कहा।
स्थानीय ग्रामीणों और आंगनबाड़ी कर्मियों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी कई बार दी गई, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर तरह तरह की बाते हो रही है।
वही इस मामले में महिला एवं बाल विकास के ब्लॉक परियोजना अधिकारी अमित भारत से में उनका पक्ष जानना चाहा तो वो साफ तौर पर कुछ भी जवाब देने से मना कर पल्ला झाड़ते नजर आए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब कार्रवाई करेगा। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे, या फिर हमेशा की तरह जांच के नाम पर खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।