पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का ठेका कंपनी को संरक्षण हाईकोर्ट की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही,एक तिहाई कर्मी सम्भाल रहे जवाबदारी!

बिलासपुर

डेस्क खबर

बिलासपुरछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुरक्षा में लगे कर्मियों को अचानक बिना नोटिस निकाले जाने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।वर्षों से काम कर रहे इन फायर फाइटरों को नए ठेकेदार ने बिना कोई नोटिस दिए निकाल दिया है।वही हाईकोर्ट की सुरक्षा में भी बड़ी लापरवाही सामने आई है।जितनी संख्या के वहां फायर फाइटर होने चाहिए उसका एक तिहाई ही काम पर रखे गये है।इसके बाद भी कर्मियों की छटनी जारी है।इससे एक तरफ हाईकोर्ट की आपात सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़े हो गए है तो दूसरी तरफ वर्षों से काम कर रहे मजदूरों को अचानक निकाले जाने से बेरोजगारी के अवसाद में डूब गए है।वही जो कर्मी अभी भी काम पर है उनके अंदर भी असुरक्षा की भावना घर कर गया है।

हाईकोर्ट की फायर सेफ्टी के लिए चकरभाठा के आसपास के दर्जनों गांव से फायर फाइटर काम पर रखे गए थे।लेकिन जैसे ही ठेकेदार परिवर्तित हुआ मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट पैदा हो गया।चकरभाठा के धमनी ,कड़ार, सेंवार हिरी, परसदा , के 3 से लेकर 13 वर्षों से फायर फाइटिंग का काम कर रहे कई फायर फाइटरों को नए ठेकेदार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के निकाल दिया गया है।इसकी वजह से इन फायर फाइटरों के सामने घर का राशन चलाने और रोजगार के नए अवसर तलाशने की मजबूरी पैदा हो गई है।तय संख्या से कम रखे गए है।फायर फाइटर बताते है कि नए अनुबंधित ठेका कम्पनी टेक्सटेल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पीडब्लूडी के अधिकारियों की शह पर लगभग एक तिहाई संख्या में कर्मचारी नियुक्त कर काम कराया रहा है।अनुबंध के अनुसार हाईकोर्ट में कुशल और अकुशल को मिलाकर कुल 28 फायर फाइटर होने चाहिए लेकिन पहले केवल 16 लोगो से काम लिया जा रहा था ।उसके बाद अचानक बिना नोटिस के आठ फायर फाइटरों को निकाल दिया गया। और तीन शिफ्ट मे केवल 8 फायर फाइटर काम कर रहे है।जो फायर फाइटर अभी भी काम कर रहे है उनके ऊपर भी निकाले जाने का संकट मंडरा रहा है ।ठेकदार द्वारा अभी चार और फायर फाइटरों को निकाले जाने की बात कही जा रही है ।

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न पूरी तनख्वाह न ईपीएफ एएसआई कटौती

फायर फाइटर बताते है कि उन्हें काम के बदले कलेक्टर दर पर भुगतान किया जाना चाहिए था ।लेकिन पढ़ाई की योग्यता के अनुसार एक मुश्त 8 से 10।हजार दिये जाते थे।उनके वेतन से न तो ईपीएफ की कटौती की जाती है और न ईएसआई काटा जाता है। उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए जाते है।इससे आपात स्थिति में उनकी खुद की सुरक्षा दांव पर लगी होती है।ठेकदार को कई बार कहने के बाद भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे है।

कंपनी का रजिस्ट्रेशन निरस्त फिर भी लिया जा रहा काम

हाईकोर्ट में फायर फाइटिंग का काम जिस टेक्सटेल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था ।उस कंपनी का लाइसेंस 25 मई 2026 को ही निरस्त कर दिया गया है।इसके बाद भी कंपनी से काम लिया जा रहा है । बिना लाइसेंस की कंपनी से निर्धारित संख्या से कम कर्मियों और बिना सुरक्षा उपकरणों के साथ काम लिया जाना और निर्धारित कलेक्टर दर से कम मजदूरी दिए जाने की अनदेखी करना लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से की जा रही बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।इससे निकाले गए फायर फाइटर तो परेशान है ही हाईकोर्ट की सुरक्षा से भी बड़ा समझौता किया रहा है ।

वही पीडब्लूडी के एसडीओ बिंद्रा प्रसाद से जब इस विषय में बात की गई तो उनका कहना था कि हाईकोर्ट की सुरक्षा में 28 लोग ही काम पर रखे गए है।जो मजदूर निकाले गए है उनके द्वारा इस तरह की बाते कही जा रही है ,जो गलत है।किसी मजदूर को रखना या नहीं रखना यह ठेकेदार का निर्णय है।हमे विभाग के द्वारा दिए गए काम होने से मतलब है ।

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फायर फाइटर टुम्मन कौशिक बताते है कि मैं तीन साल से काम कर रह था।हाईकोर्ट के कमरों में रखे सिलेंडरों की जांच करना, पंप चालू करना और अन्य काम करता था।लेकिन तीन महीने पहले मुझे बिना किसी पूर्व सूचना के निकाल दिया गया है।अब मेरे सामने परिवार के लालन पालन की समस्या आ गई है।

परसदा निवासी दुर्गेश रजक बताते है कि मैं पिछले पांच वर्ष से काम कर रहा था।हम 16 लोग काम कर रहे थे ।उनमें से 8 को बिना कोई सूचना और नोटिस के निकाल दिए है।किस कारण निकाले है नहीं पता।

पूर्णिमा रजक बताती है कि मेरे पति यहां दस साल से काम कर रहे थे।ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई।उसके बाद मुझे रखा गया था।लेकिन नए ठेकेदार ने बिना कुछ बताए और कारण के मुझे निकाल दिया है।मेरे तीन बच्चे है जो पढ़ाई कर रहे हैं।अब उनका पालन पोषण और पढ़ाई कैसे होगी इसी बात की चिंता है।

अभी काम कर रहे रामकरण वर्मा बताते है कि हम लोग हाईकोर्ट में फायर सेफ्टी का काम पहले 16 लोग मिलकर कर रहे थे।अब आठ को निकाल दिए है तो आठ ही काम कर रहे है। ईपीएफ के लिए केनरा बैंक में अकाउंट खुलवाया गया था।लेकिन ईपीएफ नहीं कटता है।10 हजार एक मुश्त दे दिया जाता है।

काम कर रहे उमाशंकर साहू बताते है मैं हाईकोर्ट में फायर सेफ्टी में 14 साल से काम कर रहा हु।यहां किसी प्रकार की सुविधा नहीं है।न ही ईपीएफ और ईएसआई काटा जा रहा है।16 लोग काम कर रहे थे ।लेकिन बिना कारण वर्करों को निकाला जा रहा है ।अब हाईकोर्ट की सुरक्षा कैसे होगी यह नहीं पता

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रामचरण का कहना है कि 16 आदमी काम कर रहे थे।8 आदमी को बिना किसी कारण निकाल दिया गया है और अभी और भी वर्कर निकाले जाने की बात कह रहे है।किसी प्रकार की ईपीएफ या ईएसआई की कटौती नहीं हो रही है।हाईकोर्ट की सुरक्षा कैसे होगी यह चिंता की बात है।

हाई कोर्ट फायर सेफ्टी से निकाले गए लोगों की सूची1 अशोक कौशिक 13 वर्ष कार्यानुभव

2 ऋषि तिवारी 13 वर्ष कार्यानुभव

3 सुरेश बंजारे 13 वर्ष कार्यानुभव

4 हीरामल बैरागी 3 वर्ष कार्यानुभव

5 महेश यादव 3 वर्ष कार्यानुभ

6 दुर्गेश रजक 3 वर्ष कार्यानुभव

7 पूर्णिमा रजक 3 वर्ष कार्यानुभव

8 टुम्मन कौशिक 3 वर्ष कार्यानुभव

काम करने वाले लोगों को निकाल दिया गया है ।