पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी सम्मान! छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक माटी और रायगढ़ कथक घराने के लिए गौरवशाली क्षण

बिलासपुर

डेस्क खबर

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक माटी और रायगढ़ कथक घराने के लिए यह बेहद गौरवशाली क्षण है। देश के सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मानों में से एक संगीत नाटक अकादमी की फेलोशिप (“अकादमी रत्न”) इस बार रायगढ़ घराने के ध्वजवाहक, पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को प्रदान की जा रही है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाएगा।​बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की गई। आइए इस खबर को एक नए नजरिए से देखते हैं और जानते हैं कि पंडित रामलाल बरेठ का भारतीय शास्त्रीय नृत्य में क्या योगदान है।​

पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को मिलने वाला “अकादमी रत्न” सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह रायगढ़ कथक घराने की समृद्ध परंपरा पर राष्ट्रीय मुहर है।​सर्वोच्च सम्मान: संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न) कला के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनय पाठक और पूर्व IAS अधिकारी डॉ. रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि पंडित बरेठ की चार पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। यह सम्मान छत्तीसगढ़, बिलासपुर और रायगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जैसा है।​से श्री बरेठ के पुत्र और रायगढ़ घराने के गुरु भूपेंद्र बरेठ ने भावुक होते हुए कहा कि यह सम्मान उनके पिता की दशकों की तपस्या और संघर्ष का परिणाम है, जिससे छत्तीसगढ़ की कला को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा मिलेगी।

जानिए कौन हैं पंडित रामलाल बरेठ?

पंडित रामलाल बरेठ रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक (Court Dancer) हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन कथक की साधना और इसके प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया है। पंडित रामलाल बरेठ का जन्म कला नगरी रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में हुआ। उन्हें नृत्य की विरासत अपने पिता पंडित कार्तिक राम से मिली, जो स्वयं अपने समय के दिग्गज नर्तक थे। पंडित रामलाल ने रायगढ़ रियासत के कला-पारखी राजा चक्रधर सिंह और अपने पिता के कड़े संरक्षण में कथक की बारीकियों को सीखा।​​रायगढ़ कथक घराना अपनी अनूठी शैली के लिए जाना जाता है। पंडित रामलाल बरेठ ने इस घराने को जीवित रखने में मुख्य भूमिका निभाई है। यह घराना मुख्य रूप से:​लखनऊ, जयपुर और बनारस घरानों के बेहतरीन तत्वों के अद्भुत समन्वय (Folk & Classical Blend) के लिए जाना जाता है।​इसमें ‘लयकारी’, ‘कवित्त’ और ‘भाव पक्ष’ का बहुत ही सुंदर संतुलन देखने को मिलता है।​

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कला गुरु के रूप में योगदान

​पंडित बरेठ ने न केवल स्वयं नृत्य किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी तैयार किया:​उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय (खैरागढ़) में रीडर के रूप में अपनी सेवाएं दीं।​वर्ष 1981 से 2011 तक, उन्होंने चक्रधर नृत्य केंद्र में मुख्य गुरु के रूप में देश-विदेश के सैकड़ों शिष्यों को तराशा, जो आज वैश्विक मंचों पर रायगढ़ घराने का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।​

प्रमुख सम्मान और पुरस्कार

​पंडित रामलाल बरेठ का जीवन उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्हें मिले प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं:

भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान।अकादमी रत्न संगीत नाटक अकादमी का सर्वोच्च सम्मान (वर्तमान घोषणा)।संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा।चक्रधर सम्मान छत्तीसगढ़ शासन द्वारा।शिखर सम्मान कला के क्षेत्र में उनकी सर्वोच्च साधना के लिए।

पंडित रामलाल बरेठ सिर्फ एक नर्तक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवित सांस्कृतिक धरोहर हैं। 80 से अधिक वर्षों की उनकी यह कला-यात्रा आज “अकादमी रत्न” के रूप में अपने शिखर पर पहुंची है, जो हर कलाप्रेमी के लिए प्रेरणादायक है।