बिलासपुर
डेस्क खबर
संसद के विशेष सत्र में पेश किए जाने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश मंत्री श्रीमती हर्षिता पाण्डेय ने सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने इस बिल को ‘गेम चेंजर’ बताते हुए आधी आबादी के अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।

प्रमुख बिंदु: प्रेस वार्ता के मुख्य अंश
ऐतिहासिक मील का पत्थर: श्रीमती पाण्डेय ने कहा कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने इस साहसी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा महिलाओं को उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता: आंकड़ों के जरिए महिला प्रतिनिधित्व की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए हर्षिता पाण्डेय ने बताया कि:पहली लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मात्र 4.5% थी, जो 7 दशकों बाद भी केवल 14% तक ही पहुँच पाई है।अविभाजित मध्य प्रदेश (1998) में छत्तीसगढ़ क्षेत्र से मात्र 6 महिला विधायक थीं, जिनकी संख्या आज भी केवल 19 है।इन्हीं विसंगतियों को दूर करने के लिए यह बिल अनिवार्य था।
वोट बैंक नहीं, शक्ति का प्रतीक: विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने महिलाओं को केवल ‘वोट बैंक’ समझा। कई दल बिल लाए लेकिन उसे पारित कराने की राजनैतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे न केवल पटल पर रखा, बल्कि महिलाओं को नीति-निर्धारक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
“आज महिलाएं केवल सरकारी नीतियों की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं नीति-निर्धारक बनने जा रही हैं। जब सदन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो भारत की राजनीति में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।” श्रीमती हर्षिता पाण्डेय, प्रदेश मंत्री (भाजपा)
विकसित भारत का संकल्प हर्षिता पाण्डेय ने विश्वास जताया कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से 2029 तक देश की विधानसभाओं और लोकसभा की तस्वीर बदल जाएगी। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब महिलाओं के नेतृत्व में ही भारत ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की ओर अग्रसर होगा।निष्कर्ष: प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट नीति और नेक नियत के कारण ही आज देश की बहनें खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं और इस ऐतिहासिक पहल के लिए उनका अभिनंदन करती हैं।