बिलासपुर
राकेश मिश्रा
ग्रामीण महिला के साथ बैंक कर्मियों द्वारा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।जिसमें फिक्स डिपॉजिट करने आई महिला को जानकारी दिए बिना उसका और उसके पति के नाम पर बीमा कर दिया गया।महिला को इसकी जानकारी तब हुई जब वह पांच साल बाद अपने फिक्स डिपॉजिट का पैसा निकलवाने बैंक गई।वहां उसे बताया गया कि उसका बीमा हुआ था जिसमें उसकी किश्त की राशि पूरी नहीं पटाए की वजह से डूब गई है।अब महिला बैंक के चक्कर लगा लगा कर था गई है और बैंक वाले उसे एक एक हफ्ते का समय देकर घुमा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार तखतपुर क्षेत्र के कुआं में रहने वाली शिवकुमारी के जमीन का लगभग बीस डेसिमल हिस्सा सिंचाई विभाग के नहर निर्माण में अधिग्रहीत कर लिया गया।अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के रूप में शिवकुमारी को एक लाख अस्सी हजार का चेक मिला था।जिसे लेकर वह तखतपुर के मक्कड़ कॉम्प्लेक्स में संचालित एचडीएफसी बैंक गई।वहां उसने चेक की राशि को एफडी कराने की बात कही। वहां टेबल पर बैठी वर्षा मैडम ने उसका खाते खुलवा दिया।साथ ही उसने शिवकुमारी से 50 हजार और जमा कर सकने की बात पूछी,जिसके जवाब में शिव कुमारी ने बताया कि वह गरीब है और मजदूरी करके जीवन यापन करती है ।वह थोड़ा थोड़ा करके बीस हजार तक और जमा कर सकती है।

वर्षा मैडम ने उसे ठीक है कहते हुए उसको एफडी हो जाने का आश्वासन दिया।एक से दो महीने बाद वर्षा मैडम दो लड़कों के साथ शिवकुमारी के पास पहुंची और कुछ कागज में हस्ताक्षर छूट जाने की बात कहते हुए कुछ कागजों में शिव कुमारी के हस्ताक्षर करवा लिए और साथ ही चेक बुक निकलवाकर उसमें से कुछ चेक में भी हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद फिर से एक महीने बाद वर्षा मैडम शिवकुमारी के पास पहुंची और उसे एफडी हो जाने की जानकारी देते हुए पांच साल बाद चार लाख मिलने की बात कही।शिवकुमारी ने पांच साल तक धैर्य पूर्वक एफडी के मैच्योर होने का इंतजार किया ।जब मियाद पूरी हो गई तो वह अपना एफडी तोड़वाने बैंक पहुंची तो उसके पैरो के नीचे की जमीन यह जानकर खिसक गई कि उसका खाता बंद हो चुका है और उसके पैसे भी डूब चुके है।

जब उसने पूछा कि पैसे कैसे डूब गए तो बताया गया कि शिवकुमारी और उसके पति छोटेलाल के नाम पर क्रमशः 30 हजार सालाना और 51 हजार सालाना किश्त का बीमा किया गया था।बीमे का केवल दो किश्त पटाया गया था तीसरा किश्त नहीं पटने से पॉलिसी लेप्स हो गया है और किश्त की राशि भी डूब गई है।जब शिव कुमारी ने बैंक कर्मियों से अपने द्वारा बीमा नहीं एफडी कराने की बात बताई तो उसे अगले हफ्ते आने की बात कहकर महीने भर से बैंक का चक्कर लगवाया जा रहा है।
वही इस मामले में जब एचडीएफसी बैंक तखतपुर के शाखा प्रबंधक से बैंक का पक्ष जानने के लिए मुलाकात की गई तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कोई भी जानकारी या वक्तव्य देने के लिए अधिकृत नहीं होना बताया।
एक गरीब मजदूर महिला महीने भर से अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा पाने के लिए बैंक के चक्कर काट रही है और ब्रांच मैनेजर मामले की जानकारी नहीं होना बता रहे है।इससे स्पष्ट होता है कि मामले में बैंक का रवैया गरीब महिला के पैसों को लेकर सहयोगात्मक नहीं है।अब महिला अपने पैसों के कानूनी लड़ाई लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।लेकिन शातिर बैंक कर्मियों के जाल में डूबा हुआ गरीब मजदूर का पैसा उसे वापस मिल पाए इसके लिए लड़ाई बहुत ही कठिन है।