बिलासपुर
डेस्क खबर
शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में शून्य हो चुके तखतपुर के लिए विधायक धर्मजीत सिंह की गंभीर पहल ने तखतपुर में एक बड़े शासकीय अस्पताल की उम्मीद जगाई है।बुधवार को विधायक धर्मजीत सिंह के आग्रह पर बिलासपुर कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल ने 50 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल के लिए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के पास उपलब्ध जगह के साथ साथ पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास उपलब्ध जमीन और भवनों का निरीक्षण किया।इस दौरान विधायक धर्मजीत सिंह ने नए सामुदायिक भवन के पास उपलब्ध जगह को मातृ शिशु अस्पताल के लिए अनुपयुक्त बताते हुए,मातृ शिशु अस्पताल को पुराने सामुदायिक भवन की जमीन पर व्यवस्थित तरीके से बनाने की मांग रखी।

उनका कहना था कि नगर की जनसंख्या लगभग 25 हजार के आसपास है और आने वाले समय में यह और भी बढ़ेगी।इतनी बड़ी संख्या को केवल एक सिटी डिस्पेंसरी या दो तीन दिन की ओपीडी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है।तखतपुर नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र न केवल तखतपुर नगर वासियों के लिए बल्कि आसपास के सभी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए भी सुविधाजनक था।नए सामुदायिक केंद्र भवन का निर्माण गलत जगह करके वहां आनन फानन में स्थानांतरित कर दिया गया है।यह स्थल पहले भी अनुपयुक्त था और 50 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल के लिए भी अनुपयुक्त है।प्रस्तावित जगह तालाब के जैसा गड्ढा है वहां हॉस्पिटल बनाने से उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।विधायक ने बताया कि पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के पास पर्याप्त जमीन है, जहां मातृ शिशु अस्पताल का निर्माण होने से पूरे क्षेत्र की जनता को लाभ मिलेगा।

विधायक धर्मजीत सिंह की बातों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने सीजीएमएससी के एसडीओ और इंजीनियर से प्रस्तावित जमीन पर निर्माण की योजना और इस्टीमेट की जानकारी ली और निर्माण की योजना में सारी व्यवस्थाओं के साथ आने वाली सभी समस्याओं से निपटने के लिए ड्राइंग ,डिजाइन और इस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव देने का निर्देश दिया।ताकि आने वाले समय में निर्माण कार्य के लिए राशि की कमी न हो।
50 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल हुआ है स्वीकृत
विधायक धर्मजीत की पहल पर तखतपुर के लिए 50 बिस्तर का मातृ शिशु अस्पताल स्वीकृत किया गया है।इसके भवन निर्माण के लिए 9 करोड़ से अधिक का बजट भी स्वीकृत हो गया है।इस अस्पताल के लिए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित जमीन को चिन्हांकित किया गया है।लेकिन वह जमीन गड्ढे में होने के कारण हॉस्पिटल भवन के लिए उपयुक्त नहीं है।अभी वहां मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। सीएचसी के लिए ही पक्की सड़क नहीं है।इसलिए विधायक ने 50 बिस्तर अस्पताल का भवन पुराने सीएचसी की जमीन पर बनवाए जाने की मांग रखी।इससे नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को इसका लाभ मिलेगा।
कलेक्टर के अपने तर्क
जब 50 बिस्तर हॉस्पिटल को पुराने सीएचसी की जमीन पर बनाने की मांग की गई तो ,उनका तर्क था कि आने वाले समय को ध्यान में रखकर निर्माण कराया जा रहा है।अभी जहां नया सीएचसी है वह आने वाले समय में विस्तार के बाद शहर से जुड़ जाएगा।हमने मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल भी कोनी में बनवाया है।फ्यूचर की प्लानिंग करके भी सोचा जाना चाहिए।लोगो का कहना है कि अभी नगर की जनसंख्या 25 हजार है तो आने वाले समय में 50 हजार भी हो सकता है।साथ ही नगर का विकास एक तरफा न होकर सभी दिशाओं के होगा ऐसे में सुदूर ग्रामीण क्षेत्र और उसकी बढ़ती आबादी को भी ध्यान में रखकर पुराने सीएचसी भवन में ही उपयुक्त रहेगा क्योंकि यह हर तरफ से आने वाले लोगो के लिए पास पड़ेगा।साथ ही पुराने सीएचसी के आसपास अन्य कार्यकार्य होने से वहां लोगो के कई काम एक बार के आने से हो सकता था।पुराने सीएचसी में मुंगेली जिले के भी सरहदी गांव के मरीज भी इलाज कराने आते थे।
इन्होंने यह कहा
“हमने दोनों स्थलों का निरीक्षण किया है। पुराने अस्पताल की कुछ बिल्डिंग जर्जर हैं जिन्हें डिस्मेंटल करना होगा। हमने इंजीनियरों को विस्तृत रिपोर्ट बनाने को कहा है ताकि यह तय किया जा सके कि कहां और कैसे बेहतर अस्पताल बनाया जा सकता है।”— संजय कुमार अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर,
“मुख्यमंत्री जी ने ₹9 करोड़ की लागत से 50 बिस्तर के अस्पताल की स्वीकृति दी है। हमारी कोशिश है कि यह अस्पताल शहर के पुराने स्थान पर ही बने ताकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दूर न जाना पड़े। कलेक्टर साहब ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।”— धर्मजीत सिंह, विधायक, तखतपुर