तखतपुर: अमृत मिशन 2 के तहत करोड़ों के काम में बंदरबांट, गुणवत्ता को ताक पर रख कर किया जा रहा रेस्टोरेशन ।

बिलासपुर

डेस्क खबर

नगर पालिका परिषद तखतपुर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2’ योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। नगर में 46 करोड़ रुपये की लागत से पाइपलाइन विस्तार का कार्य चल रहा है, लेकिन काम की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ठेकेदार द्वारा सड़कों के रेस्टोरेशन (मरम्मत) कार्य में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे भविष्य में सड़कों के धंसने और खराब होने का खतरा मंडराने लगा है।

अधिकारियों की अनुपस्थिति का फायदा उठा रहे ठेकेदार

नगर के विभिन्न वार्डों में लगभग 36 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों की बेतरतीब खुदाई की गई थी। हाइड्रो टेस्टिंग के बाद अब इन सड़कों को वापस भरने (रेस्टोरेशन) का काम जारी है। नियमतः यह काम नगर पालिका के इंजीनियरों और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में होना चाहिए, लेकिन धरातल पर नजारा कुछ और ही है। मौके से नगर पालिका का अमला नदारद रहता है, जिसका पूरा फायदा उठाते हुए ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करवा रहे हैं।

अनुपात में बड़ा ‘खेल’: मानकों से समझौता

सड़क रेस्टोरेशन के दौरान बेस तैयार करने में भारी तकनीकी गड़बड़ी सामने आ रही है:मटेरियल रेशियो में हेरफेर: तकनीकी मापदंडों के अनुसार सीमेंट, रेत और गिट्टी का अनुपात 1:4:8 होना चाहिए। लेकिन मौके पर ठेकेदार द्वारा 1:7:8 के अनुपात में सामग्री मिलाई जा रही है। यानी सीमेंट की मात्रा आधी कर दी गई है, जिससे बेस बेहद कमजोर बन रहा है।अमानक सामग्री का उपयोग: काम में इस्तेमाल हो रही गिट्टी (स्टोन साइज) निर्धारित मानक से काफी बड़ी है। इतना ही नहीं, सीमेंट की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है।

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जनता की बढ़ी परेशानी

पिछले कई महीनों से खोदी गई सड़कों के कारण धूल और गड्ढों से जूझ रही जनता को उम्मीद थी कि रेस्टोरेशन के बाद राहत मिलेगी। लेकिन जिस तरह से गुणवत्ताहीन कार्य किया जा रहा है, उससे साफ है कि पहली बारिश के साथ ही ये सड़कें फिर से उखड़ जाएंगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की नाक के नीचे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, पर कोई देखने वाला नहीं है।”46 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में यदि बेस ही कमजोर रहा, तो पाइपलाइन के ऊपर बनी सीसी रोड चंद दिनों में ही जवाब दे देगी। जिम्मेदार अधिकारियों का मौके पर न होना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।