बिलासपुर
डेस्क खबर
हाईकोर्ट से नए भवन की कमियों को छुपाकर शिफ्टिंग का आदेश लेने और आदेश का बहाना करके आधे अधूरे इंतजाम के साथ केवल नवीन भवन को देखकर लिदरी में शिफ्ट किये गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परेशनिया सामने आने लगी है।मंगलवार को सीएचसी में भर्ती मरीज 20 घंटे से बिजली के आने का इंतजार करते रहे और 43 डिग्री की गर्मी से जूझते रहे। बिजली गुल होने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पानी नहीं होने से भी मरीज और उसके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।वही बिजली और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस परेशानी के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे।

तखतपुर क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लिदरी में स्वास्थ्य व्यवस्था खुद “वेंटिलेटर” पर नजर आ रही है।सोमवार को आंधी बारिश के आने से गुल हुई बिजली मंगलवार के दोपहर 4 बजे तक भी नहीं आया था।इस बीच लगभग 20 घंटे तक यहां भर्ती मरीज, नवजात शिशु और प्रसूता माताएं इस 43 डिग्री की भीषण गर्मी का सामना केवल कपड़े से पंखा करके करते रहे।आधे अधूरे इंतजाम की जानकारी छिपाकर हाईकोर्ट से तुरंत शिफ्टिंग का आदेश लेकर तखतपुर की 25 हजार और आसपास दर्जनों गांवों के हजारों की जनसंख्या की स्वास्थ्य जरूरतों को अनदेखा करके लिदरी के नवीन भवन में शिफ्ट किये गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कमियां अब धीरे धीरे सामने आने लगी है।स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और जल्दबाजी का खामियाजा तखतपुर नगर की जनता और आसपास के ग्रामीण तो भुगत ही रही हैं । करोड़ों की लागत से बने इस नए भवन में सुविधाओं की कमी से मरीज और स्वास्थ्य कर्मी भी परेशान हो रहे हैं।
43 डिग्री की गर्मी और कपड़े का पंखा भीषण गर्मी में मासूमों की चीखें, पानी को तरसे परिजन अस्पताल में बिजली न होने के कारण न पंखे चल रहे हैं और न ही कूलर। उमस और गर्मी के कारण वार्डों में भर्ती नवजात बच्चे बिलखते रहे। बिजली बंद होने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई , जिससे मरीजों के परिजनों को पीने और निस्तारी के पानी के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है।43 डिग्री की गर्मी को केवल कपड़े से पंखा करके कम करने का प्रयास करते दिखाई दिये।

वैक्सीन कोल्ड चेन पर खतरा
बिजली गुल होने का सबसे घातक असर अस्पताल के ‘कोल्ड चेन पॉइंट’ पर पड़ रहा है। जीवनरक्षक टीकों और वैक्सीन को एक निश्चित तापमान पर रखना अनिवार्य होता है। 20 घंटों से पावर कट के कारण वैक्सीन के खराब होने का डर बना हुआ है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो लाखों रुपए की दवाइयां बेकार हो जाएंगी और क्षेत्र का टीकाकरण अभियान ठप हो जाएगा

बरसात में यह चुनौतियां होंगी सामने
अस्पताल को शिफ्ट करते समय लोगो ने आधी अधूरी व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जवाबदारों को सचेत किया था।मगर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर शिफ्टिंग कर दिया गया।अब आने वाले बरसात में जलभराव, पहुंच मार्ग की समस्या और बिजली के अस्थाई कनेक्शन का सामना करना पड़ेगा।इससे होने वाली परेशानियों जिम्मेदार अधिकारियों ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
विधायक धर्मजीत सिंह स्थल चयन पर जताई थी नाराजगी
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय विधायक धर्मजीत सिंह ने भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्थल चयन को लेकर शुरू से ही आपत्ति जताई थी। विधायक ने कहा कि:”स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं पूरी तरह आधी-अधूरी हैं। गलत तरीके से स्थल चयन कर जनता को मुसीबत में डाला गया है। इतनी बड़ी आबादी को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना विभाग की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।
बड़ा सवाल: आखिर जवाबदेही किसकी?
करोड़ों के अस्पताल में जनरेटर या बड़े इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है?अधिकारी लापरवाह क्यों? क्या किसी जेई के छुट्टी पर जाने से पूरी व्यवस्था ठप कर दी जाएगी?संवेदनशीलता कहां गई? नवजात बच्चों और गंभीर मरीजों की जान से इस तरह खिलवाड़ कब तक चलेगा?निष्कर्ष: लिदरी सीएचसी की यह तस्वीर बताती है कि सिर्फ आलीशान इमारतें बनाने से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं सुधरतीं, उनके सुचारू संचालन के लिए इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।