हनुमान जी की सवारी निकली रतनपुर के भ्रमण को,भक्तों ने उत्साह से कराया नगर भ्रमण

बिलासपुर

डेस्क

बिलासपुर जिले के प्रसिद्ध रतनपुर नगर में हनुमान जी की पालकी शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई।वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अष्टमी को हनुमान जी को रामटेकरी से करैहापरा लाया जाता है ,जहां से नवमी की पूरी रात्रि में हनुमान जी को रतनपुर नगर का भ्रमण कराकर विधिविधान से दशमी की भोर में पुनः मंदिर में स्थापित किया जाता है।इसमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और युवा शामिल होते है।

चैत्र नवरात्रि के समापन और राम नवमी के अवसर पर धार्मिक नगरी रतनपुर में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार हनुमानजी की भव्य शोभायात्रा पूरे अनुशासन और आस्था के साथ निकाली गई। अष्टमी से शुरू होकर दशमी की भोर तक चलने वाला यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है।परंपरा के अनुसार, अष्टमी तिथि पर हनुमानजी को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ राम टेकरी मंदिर से करैहापरा मालगुजार बाड़े में लाया जाता है,जहा विशेष पूजन कर रात्रि में उन्हें विश्राम कराया जाता है।

नवमी की रात करीब 11 बजे करैहापारा से हनुमानजी की शोभायात्रा प्रारंभ होती है। सुसज्जित पालकी में विराजित भगवान को मशालों, पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘मचल और जयघोष के बीच नगर के प्रमुख मार्गों से पुरी रात भ्रमण कराते हुए। यह यात्रा दशमी की भोर में रामटेकरी मंदिर पहुंचती है, जहां विधिवत पूजा के बाद हनुमानजी को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाता है। जनश्रुति के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत रतनपुर के तत्कालीन शासक भीमा जी राव भोंसले द्वारा की गई थी। वर्तमान में भी इस परंपरा का निर्वहन स्थानीय समिति और नागरिकों के सहयोग से किया जा रहा है।आयोजन में बुजुर्गों के साथ युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। परंपरा के संरक्षण और संचालन में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही हैं , जिससे यह आयोजन व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप में संपन्न हुआ। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह आयोजन रतनपुर की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

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