दसवीं पास डॉक्टर के हाथों हो सकता था लोगो की सेहत से खिलवाड़, युवकों की सतर्कता से पकड़े गए,पुलिस की नरमी से छूटे!

बिलासपुर

राकेश मिश्रा

बिलासपुर के तखतपुर में पुलिस और प्रशासन का लापरवाही भरा कार्यशैली सामने आया है। आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर लोगो को ठगने आए दसवीं पास यूपी दो युवकों को प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर छोड़ दिया गया।जबकि उनके पास बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां और संदिग्ध पाउडर बरामद हुए थे।इससे जहां आमजनता की सुरक्षा को लेकर पुलिस की गंभीरता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है तो प्रशासन द्वारा उन्हें तुरंत जमानत दे दिए जाने से लोगो मे काफी नाराजगी है। इस मामले में नगर के एक पार्षद की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे है कि वह नगर की जनता के हितों की अनदेखी करते हुए बाहरी लोगों को जमानत दिलाने में अगुवाई क्यों कर रहा था।लोगो के बीच यह चर्चा है कि बाहरी लोगों की मदद के पीछे कुछ बड़े नेताओं का भी हाथ था।

उत्तरप्रदेश के तीन युवक तखतपुर आए और यहां एक मकान किराए में लेकर पंपलेट छपवाया कि कई प्रकार के बीमारियों का इलाज कर सकते है।उन्होंने बाकायदा इस पंपलेट को बंटवाया और नगर में प्रचार भी कराया।कल से वे एक वैवाहिक भवन में।इलाज शुरू करने वाले थे। जब स्थानीय लोगों ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने उनके पास इलाज के लिए किसी प्रकार की डिग्री या शासकीय अनुमति नहीं होने की बात बताई।साथ ही इलाज आयुर्वेदिक पद्धति से करना बताया।जब पुलिस ने उनके कमरे की तलाशी ली तो वहां बड़ी मात्रा में गैस और मल्टीविटामिन की एलोपैथिक दवाएं पाई गई। मामला पुलिस तक पहुंचा और पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर उन्हें तहसील न्यायलय में प्रस्तुत किया जहां से उन्हें छोड़ दिया गया।

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नगर में आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की एक बड़ी साजिश को स्थानीय लोगों की सतर्कता से नाकाम कर दिया गया।लेकिन पुलिस और प्रशासन द्वारा उन्हें बिना किसी ठोस कार्यवाही के छोड़ दिया जाना दोनों की आमजनता की सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक गंभीरता पर प्रश्न खड़े करता है। उत्तर प्रदेश से आए दसवीं पास तीन युवकों ने एक वैवाहिक भवन में शिविर लगाकर आयुर्वेदिक इलाज करने के नाम पर लोगो को ठगने और उनकी सेहत से खिलवाड़ करने की पूरी योजना बनाई थी ।लेकिन स्थानीय युवकों की सतर्कता ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया। यहां के युवकों को सूचना मिली कि यूपी के तीन युवक कैलाश नगर शिव मंदिर के पास मकान किराए पर लेकर रह रहे हैं और आयुर्वेदिक उपचार द्वारा गंभीर बीमारियों को ठीक करने का प्रचार प्रसार कर रहे है।नगर के लोगों जब उनसे जाकर पूछताछ किया तो पूरा षडयंत्र उजागर हो गया।पुलिस बुलाकर जब उनके कमरे की तलाशी ली गई तो वहां बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं और पुड़ियों में संदिग्ध पाउडर भी बरामद हुआ।साथ ही उनके पास किसी प्रकार की डॉक्टरी डिग्री नहीं होना भी पाया गया।लोगो ने आक्रोशित होकर उनकी पिटाई कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया।लेकिन पुलिस ने पूरी जांच किए बिना ही उनके विरुद्ध साधारण प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर तहसीलदार के सामने प्रस्तुत कर दिया जबकि उनका एक साथी उस समय तक फरार था।तहसीलदार ने भी एक अंजान व्यक्ति की जमानत पर उनको छोड़ दिया।जबकि इस मामले में पुलिस चाहती तो और भी धराए लगा सकती थी।लेकिन नहीं लगाई गई।युवकों की सहायता के लिए पर्दे के पीछे से एक लोकल नेता और प्रत्यक रूप से एक पार्षद ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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झूठा प्रचार कर लोगो को जान जोखिम में डालना

यूपी से आए दसवीं पास मोहम्मद हकीम अकबर और मोहम्मद जैद अपने एक अन्य साथी के साथ तखतपुर आकर लकवा,बवासीर,सियाटिका ,गुर्दे की पथरी सहित अन्य कई बीमारियों का आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज करने का दावा करते हुए पंपलेट छपवाकर नगर में बंटवाया और ऑटो में स्पीकर लगाकर तीन से चार दिनों तक प्रचार कराया । इस तरह वह यह जानते हुए भी कि ऐसा करना लोगो की जान जोखिम में डालना है ।लगातार प्रचार करता रहा ।उनका यह कृत्य धाखाधड़ी की श्रेणी में आता है और

प्रतिरूपण अर्थात ऐसे पद (डॉक्टर) का दिखावा करना जो वे वास्तव में नहीं हैं ,का अपराध बनता है

खुद को डॉक्टर बताकर और पंपलेट के जरिए झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करने पर धोखाधड़ी का मामला बनता है।

ड्रग्स मैजिक रेमेडीज एक्ट, 1954 का कानून इस मामले में सबसे सटीक बैठता है, जिसमें इलाज करना जरूरी नहीं है, बल्कि सिर्फ दावा करना ही अपराध है।इस अधिनियम (The Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act) के तहत बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण या वैध डॉक्टरी योग्यता के “चमत्कारी इलाज” या “कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करने” का दावा करने वाले पंपलेट छपवाना और बांटना संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है।इसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती थी, भले ही उन्होंने एक भी मरीज न देखा हो।इसके लिए तीन से पांच वर्ष की सजा और एक लाख तक जुर्माना का प्रावधान है

बड़ी मात्रा में संदिग्ध पाउडर पुड़ियों में रखे थे जिनकी जांच होना आवश्यक है अतः उनकी जब्ती बनाई जानी थी

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जो अंग्रेजी दवाएं वहां भंडारित की गई थी उन्हें जब्त क्यों नहीं किया गया?

यूपी पुलिस से उनके चारित्रिक विश्लेषण की मांग क्यों नहीं की गई?यदि किया गया था तो रिपोर्ट आने तक इंतजार क्यों नहीं किया?

अवैध रूप से एलोपैथिक दवाओं का भंडारण

उनके कमरे से भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं बरामद हुईं।ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत, बिना किसी वैध मेडिकल लाइसेंस या ड्रग लाइसेंस के व्यावसायिक उद्देश्य या दूसरों को बांटने के लिए बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का भंडारण (Stocking) करना अपने आप में एक स्वतंत्र अपराध है। इसके लिए किसी को दवा बेचना या देना अनिवार्य नहीं है, दवाओं का अवैध कब्ज़ा ही कार्यवाही के लिए काफी है।

लेकिन तखतपुर पुलिस ने इन सभी पक्षों पर ध्यान नहीं दिया और केवल प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करके लोगो की सेहत से खिलवाड़ की साजिश रचने वालों को साधारण धाराएं लगकर जमानत मुचलके का मौका दे दिया।रही सही कसर यहां के एक नेता और पार्षद ने उनकी मदद करके पूरी कर दी।