बिलासपुर
राजीव दुबे
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर श्री सिद्धबाबा अद्वैत परमहंस आश्रम, बेलगहना के परम श्रद्धेय स्वामी शिवानंद जी महाराज ने अपने परिकर के साथ गणेशपुरी, कारीआम स्थित आश्रम पहुंचकर भगवान स्वयंभू गणेश और मां आदिशक्ति काली का विधि-विधान से पूजन कर ज्योति कलश के दर्शन किए।बद्रीनाथ से रामेश्वरम मार्ग पर स्थित यह वनांचल क्षेत्र स्वामी सदानंद जी महाराज की चरण-रज से पवित्र प्राचीन साधना, शक्ति और शांति का प्रमुख केंद्र है।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “भगवान सदगुरु की कृपा से प्रेरित जीवन ही श्रद्धा, समर्पण, सेवा और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। सनातन संस्कृति में अन्नदान को महादान और जीव-सेवा को नारायण सेवा माना गया है। भूखे को भोजन कराकर तृप्त करना ही मानवता, करुणा और परोपकार का सच्चा स्वरूप है।” उन्होंने युवाओं और श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की आराधना-परंपरा, गुरु-तत्त्व के प्रति निष्ठा और लोककल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

गणेशपुरी के बाद महाराजश्री ने बस्ती डोंगरी स्थित पतंजलि आश्रम में आयोजित प्रसादी में भाग लिया, जोगी गुफा के प्राकृतिक झरनों व शांत वादियों का अवलोकन किया तथा मानस तीर्थ सोनकुंड आश्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।इस पावन अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, पाली, रतनपुर, बिलासपुर, लोरमी, मुंगेली, कोटा, बेलगहना और पंडरिया समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन का लाभ लेकर नवरात्र के इस धार्मिक उत्सव में सहभागिता की।
