जब कलेक्टर के सामने ही काम को लेकर एसडीएम के पैरों पर गिर गया किसान!

बिलासपुर

राकेश मिश्रा

नगर पालिका तखतपुर में आयोजित सुशासन तिहार (शिविर) का नजारा उस वक्त हैरान कर देने वाला हो गया, जब एक बुजुर्ग किसान ने कलेक्टर के सामने ही एसडीएम के पैर पकड़ लिए। यह मार्मिक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स हतप्रभ रह गया। वहीं यह घटना राजस्व विभाग की लेट लतीफी और लोगों की समस्याओं के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।बिलासपुर जिले के तखतपुर नगर पालिका की है, जो सीधे तौर पर राजस्व विभाग की कछुआ चाल और सुस्त कार्यशैली पर एक व्यंग्य की तरह देखा जा रहा है।

मालिक, पैर पड़ता हूँ…’ और रो पड़ा बुजुर्ग किसान

तखतपुर के सुशासन शिविर में जब कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल लोगों विभागों के स्टाल का निरीक्षण कर हे थे, तभी विजयपुर निवासी बुजुर्ग किसान बहोरिक पाल अपनी फरियाद लेकर उनके सामने पहुंचे। कलेक्टर ने बगल में खड़े एसडीएम नितिन तिवारी की तरफ इशारा करते हुए मजाकिया लहजे में कहा, “आपका काम यही करेंगे, यही इस क्षेत्र के मालिक हैं।”कलेक्टर के मुंह से इतना सुनना था कि बुजुर्ग बहोरिक पाल के सब्र का बांध टूट गया। सालों से दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुका यह बुजुर्ग तुरंत एसडीएम नितिन तिवारी के कदमों में गिर गया और रोते हुए बोला

:”ए मालिक. ए.. तव तो मैं एखर पांव परत हव, मोर सच्चाई के काम नइ होवत हे, बस एही बात के दुख है।”

भरे शिविर में बुजुर्ग को अपने पैरों पर गिरा देख एसडीएम हतप्रभ रह गए। उन्होंने तुरंत बुजुर्ग को उठाया, ढांढस बंधाया और काम जल्द करने का भरोसा दिया। इस भावुक दृश्य को देखकर कलेक्टर ने भी तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए एसडीएम को निर्देश दिया कि इस बुजुर्ग का काम प्राथमिकता से सबसे पहले किया जाए।

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क्या है पूरा मामला? (चार साल की प्रताड़ना की दास्तान)

बुजुर्ग बहोरिक पाल पिछले 4 सालों से सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं। मामला जमीन पर अवैध कब्जे और रास्ते के विवाद का है:विवाद की शुरुआत: बहोरिक पाल ने शिकायत की थी कि गांव का ही एक दबंग और अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति, गीता प्रसाद, उसकी लगानी जमीन के पास की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रहा है। इस कब्जे की वजह से बहोरिक के ट्रैक्टर के आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।

प्रशासनिक आदेश और फिर से कब्जा:

शिकायत के बाद जांच हुई, मामला सच पाया गया और प्रशासन ने गीता प्रसाद को बेदखल करने का आदेश जारी कर दिया। उसे हटा भी दिया गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। गीता प्रसाद ने सिंचाई विभाग द्वारा अधिग्रहीत की जा चुकी अपनी 8 डिसमिल जमीन का हवाला देकर दोबारा बहोरिक पाल की निजी जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया और वहां मनमाना मकान बनाने लगा। इस नई प्रताड़ना से तंग आकर बहोरिक ने फिर से आवेदन लगाया कि सिंचाई विभाग की जमीन को चिन्हांकित कर गीता प्रसाद पर कार्रवाई की जाए। लेकिन पिछले एक साल से यह फाइल एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय के बीच सिर्फ घूम रही थी, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सुशासन के दावों के बीच राजस्व के शासन’ की तस्वीर

सरकारें भले ही ‘सुशासन’ के बड़े-बड़े दावे करें और ‘सुशासन तिहार’ जैसे शिविर आयोजित करें, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी डराने वाली है। अगर एक सीधे-साधे किसान को अपना हक पाने के लिए और सच को साबित करने के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी के पैरों में गिरना पड़े, तो यह समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था कितनी पंगु हो चुकी है। क्या बिना पैर पकड़े या बिना मीडिया की सुर्खियों में आए किसी गरीब को न्याय मिलना नामुमकिन हो चुका है?फिलहाल, इस घटना के बाद कलेक्टर के कड़े निर्देश पर अब उम्मीद जागी है कि बहोरिक पाल को उसकी जमीन और रास्ता वापस मिल पाएगा।

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